जिले में अनेक कृषि क्षेत्रों में अब भी टिड्डियां फसलों को खराब कर रही है। वहीं, नया खतरा उनके अंडे देने का खतरा मंडराने लगा है। यदि अंडों से नए टिड्डे निकलना शुरू हो गए तो हालात बेकाबू हो जाएंगे। टिड्डी एक बार में तीन कैप्सूल देती है, उनमें 280 से अधिक अंडे होते हैं।
कृषि विभाग के उप निदेशक वीरेन्द्रसिंह सोलंकी ने बताया कि टिड्डी का रंग पीला हो रहा है। वह 15 फरवरी तक अंडे दे देगी। उन्होंने दावा किया है कि अब जिले में दो तीन छोटे छोटे दल ही बचे हैं। गुरुवार तक पूरी तरह काबू पा लिया जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे उनके अंडे देने वाले स्थान की तलाश कर सूचना दें। अंडे देते समय टिड्डी बहुत सुस्त हो जाती है। ऐसे में उन्हें मारना आसान होगा। इनका जीवन छह माह का होता है। इस दौरान तीन बार अंडे देती है।
किसानों का दावा: 30 हजार हेक्टेयर में हुआ खराबा
किसान संघ के जिलाध्यक्ष नरेश व्यास का कहना है कि शेरगढ़, देचू, बालेसर, शेखाला, लूणी, बिलाड़ा, लोहावट, बाप, फलोदी व आउ तहसील में 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में नुकसान हुआ है। 250 करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान है। ऐसे में 85 लाख का मुआवजे ऊंट के मुंह मे जीरे के बराबर है। विशेष पैकेज घोषित होना चाहिए।
कलाऊ में तीन दिन से टिडि्डयां जमी, शेरगढ़ में फिर लौटी -
- कलाऊ- यहां तीसरे दिन भी टिडि्डयांे का हमला जारी रहा। मंगलवार को कलाऊ, भींवसागर, राणासर विशननगर, सारण नगर, हेमनगर, रूपनगर, नयासरा, केसरगढ़, सावलों की ढाणी, रामसर, चांदसमा, जहवारपुरा, गोविंद पुरा, लालपुरा, बुड़किया बाकासर, उटंवालिया में दिखी।
- दयाकौर- जालोड़ा, घमनेर नगर, दलजी की ढाणी सहित अन्य गांवों में टिडि्डयों का हमला जारी है। टिड्डी नियंत्रण दल व किसान नियंत्रण में जुटे हैं लेकिन काबू नहीं आ रही। टिड्डी ने रात्रि पड़ाव घमनेर नगर में किया। यहां टिड्डियों की चादर सी बिछी मिली। अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
- शेरगढ़. तेना- भूंगरा में वन विभाग के इलाके में मंगलवार शाम को करीब 5 किलोमीटर के दायरे में भारी तादाद में टिड्डी दल ने पड़ाव डाल दिया। यहां से वे सुबह ही उड़ेगी।